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दक्षिण भारत की निर्बाध यात्रा अब संभव है, क्योंकि कोंकण रेलवे (Konkan Railway) ने ‘मिशन 100% इलेक्ट्रिकफिकेशन’ (Mission 100% Electrification) को पूरा कर लिया है। कोंकण रेलवे ने लोगों को पर्यावरण के अनुकूल, हरित और स्वच्छ परिवहन का साधन उपलब्ध कराने के लिए अपने पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क का इलेक्ट्रिकफिकेशन किया है। रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिकफिकेशन से ऊर्जा की लागत के साथ-साथ स्थानीय प्रदूषण में कमी आएगी और डीजल इंजनों से मुक्ति मिलेगी।

कोंकण रेलवे ने अपने पूरे 741 किलोमीटर मार्ग पर इलेक्ट्रिकफिकेशन का काम पूरा कर लिया है जो तटीय महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के खूबसूरत इलाकों से होकर गुजरता है। अब, रेलवे को रत्नागिरी और कुमता रेलवे स्टेशनों पर डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक इंजनों से बदलने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। नवंबर 2015 में पूरे मार्ग के इलेक्ट्रिकफिकेशन के लिए आधारशिला रखी गई थी। इस परियोजना की कुल लागत ₹1287 करोड़ है। मार्च 2020 से शुरू होने वाले छह चरणों में पूरे कोंकण रेलवे मार्ग का CRS निरीक्षण सफलतापूर्वक किया गया है।

कोंकण रेलवे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर सबसे बड़े रेलवे मार्गों में से एक है। वर्तमान में कोंकण रूट पर प्रतिदिन औसतन 16 जोड़ी मेल एक्सप्रेस ट्रेनें और 10 जोड़ी मालगाड़ियां चल रही हैं। कोंकण रेलवे में लगभग 91 सुरंगें और 1,880 पुल हैं, जिनमें रत्नागिरी के पास करबुदे में 6.5 किमी की सबसे लंबी सुरंग और रत्नागिरी में पनवेल नदी पर 64 मीटर का सबसे लंबा पुल है।

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