आज भले ही हम इस पुरुष प्रधान समाज में नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं और महिलाओं को समर्पित एक खास दिन को सेलिब्रेट करें पर हमें ये नहीं भूलना चाहिए की पुरुष भी एक इंसान ही होते हैं और उनकी भी अपनी ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे उन्हें जूझना पड़ता है। समाज भले ही पुरुष प्रधान हो लेकिन कई बार पुरुष भी अत्याचार का शिकार होते हैं। इन्हीं सारी बातों को देखते हुए हर साल 19 नवंबर को “अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस” यानी की International Men’s Day मनाया जाता है। यह दिन पुरुषों की भलाई और घरों और समाज में उनके योगदान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।
इस दिन से जुड़ी कुछ खास बातें
➤साल 1923 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाए जाने की मांग की गई थी।
➤अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की स्थापना वर्ष 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो में वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर डॉ जेरोम तिलकसिंह (Jerome Teelucksingh) द्वारा की गई थी। इस दिन के माध्यम से, वह लोगों को लड़कों और पुरुषों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते थे।
➤अपने पिता के जन्मदिन का सम्मान करने के लिए, तिलकसिंह ने 19 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में चुना।
➤भारत में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस पहली बार 2007 में 19 नवंबर को मनाया गया।
➤19 नवंबर की तारीख को इस तथ्य के आधार पर स्वीकार किया गया था कि ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज (जमैका, त्रिनिदाद और टोबैगो) पहले से ही उस तारीख को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मना रहे थे।
➤2009 में, भारत को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का पहला कॉर्पोरेट प्रायोजन मिला, जिसमें मेन्सवियर ब्रांड एलन सोली ने इस दिन पर प्रचार प्रस्ताव बनाने का निर्णय लिया।
➤यह दिन पुरुषों की भलाई और स्वास्थ्य, उनके यौन संघर्षों और उन सामाजिक कंडीशनिंग के बारे में बोलने के लिए समर्पित है, जो उनके अधीन हैं।
➤इस दिन को पूरे विश्व में कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित करके मनाया जाता है जहाँ पुरुषों और लड़कों से संबंधित मुद्दों पर बात की जाती है, समस्याओं पर चर्चा की जाती है और जागरूकता पैदा की जाती है।
➤इस साल के International Men’s Day का थीम “Better relations between men and women” है। इसका थीम का मतलब ‘पुरुषों और महिलाओं के बीच बेहतर संबंध’ स्थापित करना है।













































