जस्टिस सुधांशु धूलिया (Justice Sudhanshu Dhulia) और जस्टिस जमशेद बुर्जोर परदीवाला (Justice Jamshed Burjor Pardiwala) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज के रूप में शपथ ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एन वी रमना (N V Ramana) ने उन्हें इस पद की शपथ दिलाई। इन दोनों जस्टिस के नियुक्ति के साथ ही एपेक्स कोर्ट ने 34 न्यायाधीशों की अपनी पूरी ताकत फिर से हासिल कर लेगी, जो जस्टिस आर सुभाष रेड्डी (Justice R Subhash Reddy) की रिटायरमेंट के बाद घटकर 32 रह गई थी।
जस्टिस धूलिया उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के सुदूरवर्ती गांव मदनपुर के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून और इलाहाबाद में हुई और वे सैनिक स्कूल, लखनऊ के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और कानून की पढ़ाई की। जस्टिस धूलिया 1986 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में बार में शामिल हुए और 2000 में इसके गठन पर उत्तराखंड में स्थानांतरित हो गए। वह उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) में पहले मुख्य स्थायी वकील थे और बाद में उत्तराखंड राज्य के लिए एक अतिरिक्त महाधिवक्ता थे।
जस्टिस पारदीवाला का जन्म मुंबई में हुआ था और उन्होंने जेपी आर्ट्स कॉलेज, वलसाड से स्नातक की उपाधि प्राप्त की, और 1988 में के एम मुलजी लॉ कॉलेज, वलसाड से कानून की डिग्री हासिल की। वह चौथी पीढ़ी के कानूनी पेशेवर हैं। उनके पिता स्वर्गीय बुर्जोर कावासजी पारदीवाला ने वलसाड और नवसारी जिलों में लंबे समय तक कानून का अभ्यास किया। उनके दादा और परदादा भी वकील थे। पारदीवाला ने 1990 में गुजरात हाई कोर्ट (Gujarat High Court) में कानून का अभ्यास शुरू किया। उन्हें 1994 में बार काउंसिल ऑफ गुजरात के सदस्य के रूप में चुना गया था।










































