Home National Rani Lakshmibai: यह मूर्ति बताएगी इस वीरांगना की गाथा

Rani Lakshmibai: यह मूर्ति बताएगी इस वीरांगना की गाथा

झाँसी को वीरगाथा के लिए याद किया जाता है। इसी धरती पर रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों को धूल चटाते हुए इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम अंकित करवा लिया। इसी साहसी वीरांगना की आज 193वां जयंती है। इस शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने झांसी किले में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति का अनावरण किया।

ये मूर्ति लगभग 5 फुट की है जिसमें ऊपरी भाग सैंडस्टोन से बनाये गए हैं तो वहीं निचली भाग ग्रेनाइट से बने हैं। रानी लक्ष्मीबाई के इस स्टेचू में नीचे कुछ लाइन भी लिखी हुए है। इसमें लिखा है, “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि दी और झांसी किले से उनके शौर्य की गाथा भी बताई।

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1835 को काशी में हुआ था। इनके बचपन का नाम ‘मणिकर्णिका’ था। जब उनकी उम्र 12 साल की थी, तभी उनकी शादी झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ कर दी गई। उनकी शादी के बाद झांसी की आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित सुधार हुआ। इसके बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों को धूल चटाते हुए महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

Exit mobile version