भारत के देवासहायम पिल्लई (Devasahayam Pillai) को संत घोषित किया गया है। 18वीं सदी में ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले देवसहायम पिल्लै ऐसे साधारण भारतीय बन गए जिन्हें पोप फ्रांसिस (Pope Francis) ने संत घोषित किया है। वे वेटिकन सिटी में संत की उपाधि से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय आम आदमी बन गए हैं। पोप फ्रांसिस ने साल 2014 में देवसहायम से जुड़े एक चमत्कार को मान्यता दी थी, जिसके बाद उन्हें संत की उपाधि मिलने का रास्ता स्पष्ट हो गया था।
पोप फ्रांसिस ने सेंट पीटर्स बेसिलिका (St Peter’s Basilica) में आयोजित एक कार्यक्रम में कैनोनाइजेशन के दौरान 9 अन्य लोगों के साथ देवसहायम को संत घोषित किया। बता दें की कैनोनाइजेशन, मृत व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर संत की उपाधि देने की प्रक्रिया है। 2004 में वेटिकन द्वारा, तमिलनाडु बिशप्स काउंसिल और भारत के कैथोलिक बिशप्स के सम्मेलन द्वारा देवसहायम को बीटिफिकेशन की प्रक्रिया के लिए अनुशंसित किया गया था।
पिल्लई का जन्म 1712 में कन्याकुमारी जिले के नट्टलम में नीलकंद पिल्लई के रूप में हुआ था। जब वे त्रावणकोर में थे, तब उन्हें डच नौसेना अधिकारी कैप्टन डी लैनॉय (Captain De Lannoy) ने ईसाई धर्म से परिचित कराया था। अपने रूपांतरण के बाद, उन्होंने ‘लाजर’ या ‘देवसहायम’ का नाम ग्रहण किया, जिसका अर्थ है ‘भगवान मेरी मदद है’।














































