यूपी की तरह बिहार में भी उपद्रवियों से सरकारी संपत्ति में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। जिसे लेकर पटना हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। पिछले दिनों में बिहार में हुए अग्निपथ योजना के विरोध के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया। और कई सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया है। जिसकी भरपाई उपद्रवियों से करने की मांग पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। लेकिन कोर्ट उपद्रवियों से भरपाई मांग की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
यानि यूपी की तरह फिलहाल बिहार में ऐसी कोई करवाई नहीं होने वाली है। बता दें की दायर याचिका में छात्रों को भड़काने और अराजकता फैलाने वाले तत्वों की मदद करने वाले लोगों की जांच करने की भी मांग की गई थी। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार, 1 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा गया कि जिम्मेदार अधिकारी उग्र आंदोलन को रोकने में नाकामयाब रहे। इस कारण कई सौ करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति को नष्ट किया गया। उनका कहना था कि इस आंदोलन में क्षतिग्रस्त संपत्ति का आकलन कर आंदोलनकारियों से पैसों की वसूली की जाए। साथ ही इस आंदोलन में भाग लेने वाली राजनीतिक पार्टियों पर भी जुर्माना लगाया जाए।
और याचिकाकर्ता के मुताबिक इस घटना को समय रहते नहीं रोक पाने वाले सरकारी अधिकारियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाए और उनपर जुर्माना लगाया जाए। कोर्ट को बताया गया कि इस उग्र और हिंसक आंदोलन के कारण न सिर्फ रेलवे को काफी नुकसान हुआ, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई। दानापुर रेल मंडल को करीब 260 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कोर्ट को महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि इस आंदोलन से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह मुस्तैद थी। सरकार ने आंदोलन को रोकने के लिए सख्त इंतजाम किए थे लेकिन गलत नीयत से सरकार को बदनाम करने के लिए इस प्रकार की लोकहित याचिका दायर की गई है। राज्य सरकार ने अराजक तत्वों पर कार्रवाई की है। सरकारी संपत्ति की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे। महाधिवक्ता की ओर से दी गई जानकारी के बाद कोर्ट ने लोकहित याचिका को खारिज कर दिया।
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