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Eid Mubarak: अल्लाह के बंदों को 30 रोज़ों का इनाम है ईद, जानें इस दिन की खासियत

यूँ तो खुदा की रेहमत से चांद की खूबसूरती देखते हीं बनती है लेकिन आज का चाँद कुछ खास है। चांद का दीदार हो चूका है। आज प्यार, मोहब्बत और खुशियों का त्योहार ईद, पूरी दुनिया में हर्षोल्लाष के साथ मनाया जायेगा। रमजान का महीना सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने के पूरे दिन मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा यानि की उपवास रखते हैं। इस महीने के आखिरी दिन जब चांद का दीदार होता है तो उसके अगले दिन ईद मनाई जाती है। अल्लाह अपने बंदों को 30 रोजा का इनाम ईद के रूप में देता है। कोरोना महामारी के कारण दो साल के बाद, मस्जिदों और बाजारों में रौनक देखने को मिली है। भारत में इस बार ईद उल फितर (Eid-ul-Fitr) 3 मई 2022 को मनाई जा रही है।

ईद से जुड़ी कुछ खास बातें

  • ईद की शुरुआत चांद के दीदार से शुरू होती है और इसका समापन भी चांद के दीदार पर निर्भर करता है।
  • रमजान के पाक महीने के आखिरी दिन जब चांद का दीदार होता है तो उसके अगले दिन ईद मनाई जाती है।
  • रमजान में मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से शाम तक 30 दिन का उपवास रखते हैं। वो 30 दिनों के रोजे रखने की ताकत देने के लिए शुक्रिया अदा भी करते हैं और साथ ही दान आदि करते हैं।
  • रमजान के खत्म होते हीं शव्वाल महीना शुरू होता है। ईद अल-फितर हमेशा शव्वाल के पहले दिन मनाया जाता है, जो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार दसवें महीने में पड़ता है।
  • ऐसा माना जाता है कि पवित्र कुरान सबसे पहले पैगंबर मुहम्मद को रमजान के महीने के दौरान प्रकट किया गया था।
  • मान्यता है कि इस दिन पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने बद्र के युद्ध में शानदार विजय हासिल की थी, इस युद्ध को जीतने की खुशी में लोग प्रत्येक वर्ष ईद मनाते हैं।
  • इस दिन जकात यानी दान का भी काफी महत्व है, कुरान की मानें तो ईद के अवसर पर किसी गरीब व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान करने से अल्लाह की कृपा सदैव बनी रहती है।
  • इस दिन लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिद में सुबह की नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगते हैं।
  • हर मुस्लिम घर में दावतें आयोजित की जाती हैं और पुलाव, सालन, बिरयानी, हलीम, निहारी, कबाब, कोफ्ते और बहुत कुछ जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इस दिन का मुख्य आकर्षण क्लासिक सेवइयां, शीर कोरमा, शाही टुकड़ा और फिरनी हैं।
  • इस्लाम धर्म का यह त्योहार मूलरूप से अमन और भाईचारे को बढ़ावा देता है। सभी लोग आपसी गिले शिकवे मिटा कर मिलजुल इस त्योहार को मनाते हैं।

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