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Explained: क्या है BiPAP मशीन जो कोरोना मरीजों की बचा रही जान, वेंटिलेटर की तरह करती है काम

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BiPAP को बाई लेवल पॉजिटिव प्रेशर मशीन कहते हैं. यह मशीन उन मरीजों के लिए इस्तेमाल में लाई जाती है जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है लेकिन सांस लेने में तकलीफ है. इस मशीन को हॉस्पिटल के साथ-साथ घर में भी उपयोग कर सकते हैं.

अमेजॉन इंडिया (Amazon India) ने सोमवार को कहा कि उसने गैर सरकारी संगठन (NGO) टेमसेक फाउंडेशन के साथ साझीदारी कर सिंगापुर से 8 हजार ऑक्सीजन कॉन्सेनट्रेटर और 500 बाईपैप (BiPAP) मशीन मंगाने का काम शुरू किया है. इन दोनों मशीनों से कोरोना से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को राहत मिलेगी और मुश्किल परिस्थितियों में जान बचाई जा सकेगी.

भारत मंगाई जाने वाली ये मशीनें ऑक्सीजन कॉन्सेनट्रेटर और बाईपैप देश के अलग-अलग शहरों के अस्पतालों में डोनेट की जाएगी. सिंगापुर से इन मशीनों की पहली खेप रविवार रात मुंबई पहुंच गई और 30 अप्रैल तक बाकी की मशीनें मंगा ली जाएंगी. अमेजॉन ने कहा है कि सिंगापुर से इन मशीनों को एयरलिफ्ट करने में जो खर्च आएगा, मशीनों के प्रोक्योरमेंट में लगने वाली राशि वह वहन करेगा.

वेंटिलेटर जैसा काम

देश में कोरोना की बिगड़ती हालत के चलते मरीजों के लिए वेंटिलेटर की जरूरत बढ़ गई है. ऑक्सीजन के साथ-साथ वेंटिलेटर की मांग भी बहुत ज्यादा है लेकिन इसकी उपलब्धता में कमी देखी जा रही है. इससे निपटने के लिए कई देशों ने भारत की मदद करने का ऐलान किया है. सिंगापुर ने इसमें बड़ा कदम उठाया है और उसने क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंकर की भी सप्लाई की है. वेंटिलेटर की भारी मांग के बीच एक और मशीन है जो कोरोना मरीजों की जान बचा रही है. इस मशीन का नाम बाईपैप है जो पूरी तरह से वेंटिलेटर की तरह ही काम करती है.

बड़े काम की ये मशीन

सांस लेने में जब दिक्कत होती है तो मेडिकल के क्षेत्र में इसे सुधारने के लिए कई मशीनें हैं जिनमें सीपैप, एपैप और बाईपैप मशीनों के नाम आते हैं. BiPAP को बाई लेवल पॉजिटिव प्रेशर मशीन कहते हैं. यह मशीन उन मरीजों के लिए इस्तेमाल में लाई जाती है जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है लेकिन सांस लेने में तकलीफ है. इस मशीन को हॉस्पिटल के साथ-साथ घर में भी उपयोग कर सकते हैं. घर में इस्तेमाल होने वाली बाईपैप मशीन छोटी होती है और इसका आकार टोस्टर जैसा होता है. इस मशीन में एक ट्यूब लगी होती है जो मास्क से जुड़ती है. इस मास्क को नाक पर लगाया जाता है और उसके जरिये ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है.

कैसे मरीज करते हैं इस्तेमाल

बाईपैप का काम वेंटिलेटर की तरह ही होता है. दरअसल, जो मरीज खुद से ऑक्सीजन अपने अंदर नहीं ले पाते, इतने कमजोर हो जाते हैं कि सांस नहीं खींच पाते या संक्रमण इतना गहरा होता है कि फेफड़ा सही ढंग से काम नहीं करता तो इसमें बाईपैप मशीन मदद करती है. यह मशीन ज्यादा प्रेशर के साथ ऑक्सीजन को फेफड़े के अंदर धकेलती है जिससे मरीज सांस न भी ले पाए तो उसे बराबर ऑक्सीजन मिलती रहती है. यह मशीन सांस नली को फैला कर रखती है जिससे फेफड़े पर कम दबाव पड़ता है और मरीज राहत महसूस करता है.

मशीन में दो तरह की सेटिंग

इस मशीन को बाईलेवल इसलिए कहते हैं क्योंकि यह दो एयर प्रेशर सेटिंग पर काम करती है. जब मरीज सांस लेता है तो बाईपैप मशीन हवा का ज्यादा दबाव बनाती है. इसे मेडिकल के टर्म में इंसपिरेटरी पॉजिटिव एयरवे प्रेशर या IPAP कहते हैं. इस प्रक्रिया के तहत फेफड़े में ऑक्सीजन तेजी से और आसानी से प्रवेश करती है. दूसरी सेटिंग में जब मरीज सांस छोड़ता है तो यह मशीन एयर प्रेशर को कम कर देती है. इसे मेडिकल के टर्म में एक्सपिरेटरी पॉजिटिव एयरवे प्रेशर या EPAP कहते हैं. कुछ बाईपैप मशीनों में टाइमर लगा होता है जिससे यह सेट कर दिया जाता है कि मरीज को प्रति मिनट कितनी बार सांस लेनी है.

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