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बिहार म्यूजियम की सबसे बड़ी गैलरी सितम्बर से दर्शको के लिए खुल जाएगी।

bihar museum

बिहार म्यूजियम की सबसे बड़ी गैलरी 1 सितंबर तक दर्शकों के दीदार के लिए खुल जाएगी। दर्शक इस गैलरी में गुप्तकाल से पहले और उसके बाद के इतिहास के साथ जैनिज्म, बुद्धिज्म से मौर्य तक के इतिहास से रूबरू हो सकेंगे। इसमें कुल 62 प्रदर्श होंगे। जिसमें 22 प्रदर्श लग चुके हैं। 40 प्रदर्श अगस्त तक लगकर सितंबर में गैलरी दर्शकों के लिए खुल जायेगी। दर्शकों के लिए गैलरी में सबसे अधिक आकर्षण जहानाबाद की बराबर गुफाएं, तोरण द्वार, राजगीर की साइक्लोपियन दीवार, कलिंग युद्ध, पावापुरी जल मंदिर खास होगा। 

आइये आपको म्यूजियम में होने वाली खूबियों के बारे में बताते हैं

साइक्लोपियन दीवार 40 किमी लंबी
राजगीर की साइक्लोपियन दीवार एक 40 किमी लंबी पत्थर की दीवार है, जिसने बाहरी दुश्मनों और आक्रमणकारियों से बचाने के लिए पूरे प्राचीन शहर राजगृह को भारतीय राज्य बिहार में घेर लिया था। यह दुनिया भर में चक्रवाती चिनाई के सबसे पुराने नमूनों में से एक है। 

सबसे पुरानी बराबर गुफाएं
बराबर गुफाएं जहानाबाद जिले में गया से 24 किमी दूरी पर है। यह चट्टानों से काटकर बनाई गई सबसे पुरानी गुफाएं है। इनमें से अधिकांश गुफाओं का संबंध मौर्य काल से है और कुछ में अशोक के शिलालेख को देखा गया है। 

कलिंग भयानक युद्धों में से एक
कलिंग युद्ध प्राचीन भारतीय इतिहास के सबसे हिंसक और भयानक युद्धों में से एक है। इसका परिणाम विश्व इतिहास के सबसे प्रसिद्ध युद्धों में से एक बनाने के लिए युगांतरकारी बन गया। यह 261 ईसा पूर्व में लड़ा गया था। कलिंग का यह युद्ध राजा अशोक द्वारा लड़ी गई पहली और अंतिम लड़ाई थी और इसने उनके जीवन के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। अशोक के शासन के 8 वें वर्ष में कलिंग की लड़ाई शुरू हुई।

जैन धर्म के लिए खास जल मंदिर
पावापुरी का जल मंदिर जैन धर्म के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है। क्यूंकि माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यहाँ के जलमंदिर की शोभा देखते ही बनती है। 

बिहार म्यूजियम की सबसे बड़ी गैलरी ए सितंबर तक दर्शकों के लिए खुल जाएगी। यह गैलरी गुप्तकाल से पहले और उसके बाद के इतिहास के साथ जैनिज्म, बुद्धिज्म से मौर्य तक के इतिहास को दर्शाएगी। 

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